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ट्रंप 60 देशों को निशाना बनाते हुए नए टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने पर विचार कर रहे हैं।

ट्रंप 60 देशों को निशाना बनाते हुए नए टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने पर विचार कर रहे हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन 60 देशों पर 10% से 12.5% तक अतिरिक्त आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने पर विचार कर रहा है। Reuters के अनुसार, इन कड़े संरक्षणवादी उपायों का मुख्य कारण यह है कि वॉशिंगटन का आरोप है कि कई प्रमुख व्यापारिक साझेदार जबरन श्रम (Forced Labor) से निर्मित वस्तुओं के प्रसार को रोकने में विफल रहे हैं। यह पहल अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) द्वारा की गई विस्तृत जांच के बाद सामने आई है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर के अनुसार, विदेशी सरकारों द्वारा ऐसी प्रथाओं को सहन करना स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि इससे अमेरिकी श्रमिकों को वैश्विक बाजार में गंभीर नुकसान होता है और उन्हें उन उत्पादकों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है जो मानवाधिकारों का उल्लंघन करते हैं।

एजेंसी द्वारा तैयार योजना के तहत 10% टैरिफ देशों और क्षेत्रीय समूहों के एक बड़े समूह पर लागू होगा, जिनमें कनाडा, इक्वाडोर, यूरोपीय संघ के सदस्य देश, इंडोनेशिया, मेक्सिको, पाकिस्तान, अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, एल सल्वाडोर, ग्वाटेमाला, मलेशिया, ताइवान और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं। वहीं, अन्य 45 देशों पर 12.5% टैरिफ लगाया जाएगा, क्योंकि अमेरिकी अधिकारियों ने विशेष समीक्षा के बाद पाया कि इन देशों की बाजार निगरानी और श्रमिक शोषण-रोधी नीतियां सबसे कम प्रभावी हैं। व्हाइट हाउस का कहना है कि इन नए टैरिफ का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार में समान प्रतिस्पर्धा का माहौल बनाना और व्यापारिक साझेदारों को अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं (Supply Chains) की निगरानी मजबूत करने के लिए मजबूर करना है।

वॉशिंगटन द्वारा उठाया गया यह नया टैरिफ कदम ट्रंप प्रशासन की व्यापक और अधिक आक्रामक रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य वैश्विक व्यापारिक संबंधों को पुनर्गठित करना है। इससे पहले अमेरिका ने ब्राजील से आने वाले कुछ उत्पादों पर 25% विशेष टैरिफ लगाने की योजना की घोषणा की थी, यह आरोप लगाते हुए कि BRICS सदस्य देश अनुचित व्यापारिक प्रथाओं में शामिल है। अंतरराष्ट्रीय आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि जबरन श्रम के मुद्दे का उपयोग करके व्हाइट हाउस अमेरिकी अर्थव्यवस्था के चारों ओर नए संरक्षणवादी अवरोध खड़े करने के लिए कानूनी आधार तलाश रहा है, हालांकि इस कदम को लेकर यूरोप और एशिया की कई राजधानियों में काफी असंतोष देखा जा रहा है।

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