मैक्रों के बचाव प्रयासों के बीच फ्रांस का बजट घाटा तेजी से बढ़ा।
मैक्रों के कार्यकाल में फ्रांस सबसे गंभीर बजटीय संकट की ओर बढ़ रहा है। नई वित्तीय विधेयक (फाइनेंस बिल) के पारित न होने से बजट घाटे में तेज़ बढ़ोतरी और एक नए राजनीतिक संकट का खतरा पैदा हो गया है।
ऐक्स-आँ-प्रोवांस में आयोजित एक आर्थिक मंच पर फ्रांस के वित्त मंत्री रोलां लेस्क्यूर ने संसद से सरकारी खर्चों में बड़े पैमाने पर कटौती का समर्थन करने की अपील की, ताकि 2027 तक बजट घाटे को जीडीपी के 5% से नीचे लाया जा सके। वहीं, प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने चेतावनी दी कि यदि यह विधेयक पारित नहीं हुआ, तो मौजूदा खर्च स्वतः जारी रहेंगे और बजट घाटा बढ़कर जीडीपी के 6.5% तक पहुंच सकता है। इससे अप्रैल 2027 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले बनने वाली किसी भी नई सरकार की वित्तीय क्षमता गंभीर रूप से सीमित हो जाएगी।
देश के बिखरे हुए राजनीतिक माहौल के कारण निर्णय लेने की प्रक्रिया ठप पड़ी हुई है। 2024 से अब तक वित्तीय विवादों की वजह से दो प्रधानमंत्री अपने पद गंवा चुके हैं, और आशंका है कि शरद ऋतु में होने वाली संसदीय बहसें एक बार फिर सरकार को संकट में डाल सकती हैं।
राजनीतिक अस्थिरता निवेशकों की चिंता भी बढ़ा रही है। फ्रांस और जर्मनी के 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड के बीच का अंतर बढ़कर 80 बेसिस पॉइंट्स पर पहुंच गया है, जो पिछले नौ महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। इसे बाजार द्वारा फ्रांस के बढ़ते कर्ज़ को लेकर जताई जा रही चिंता का संकेत माना जा रहा है।
इन चिंताओं के बावजूद नीति-निर्माता आशावादी बने हुए हैं। वित्त मंत्री रोलां लेस्क्यूर और बैंक ऑफ फ्रांस के गवर्नर इमैनुएल मौलिन का कहना है कि फ्रांसीसी सरकारी बॉन्ड के प्रति निवेशकों की रुचि कम नहीं हुई है और हालिया कर्ज़ नीलामियां भी सफलतापूर्वक संपन्न हुई हैं।
अगले सप्ताह सरकार सार्वजनिक वित्त की अद्यतन समीक्षा पेश करेगी, जिसमें खर्चों में बचत के नए उपाय शामिल होंगे। वहीं, 2027 का बजट विधेयक सितंबर में संसद में पेश किया जाएगा। इस पर होने वाली बहसें प्रभावी रूप से राष्ट्रपति चुनाव अभियान की शुरुआत मानी जाएंगी, जहां देश की वित्तीय स्थिति चुनावी मुद्दों का प्रमुख केंद्र बनने की संभावना है।