ट्रंप ने अमेरिका की सर्वोच्चता को मजबूत करने के लिए सुपरइंटेलिजेंस फोर्स के गठन की घोषणा की
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने “फोर्सेज ऑफ सुपरइंटेलिजेंस” नामक एक नई सरकारी संस्था के गठन की घोषणा की है। व्हाइट हाउस प्रमुख ने यह घोषणा Truth Social पर की और इस पहल को अपने हालिया उस आदेश से जोड़ा, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नाम में बदलाव किया गया था। ट्रंप के अनुसार, इस एजेंसी का मुख्य उद्देश्य उन्नत डिजिटल तकनीकों में अमेरिका का नेतृत्व बनाए रखना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह तकनीक दुनिया पर औद्योगिक क्रांति या इंटरनेट की तुलना में भी अधिक गहरा प्रभाव डालेगी।
नई एजेंसी की जिम्मेदारी नेशनल इंटेलिजेंस के निदेशक जे क्लेटन को सौंपी गई है। इसके संचालन बोर्ड में फेडरल ट्रेड कमीशन के चेयरमैन एंड्रयू फर्ग्यूसन और संबंधित सरकारी एजेंसियों के अन्य प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। यह विशेष समूह सीधे राष्ट्रपति को रिपोर्ट करेगा। इसके सदस्य सरकारी कार्यक्रमों के बीच समन्वय करेंगे, डेवलपर्स के लिए मौजूद बाधाओं को दूर करेंगे और सरकारी डिजिटल प्रणालियों की सुरक्षा करेंगे।
इस इकाई का गठन ऐसे समय हुआ है जब तकनीकी प्रगति के रोजगार बाजार पर प्रभाव को लेकर बहस चल रही है। इससे पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक संभावित स्थिति का जिक्र किया था, जिसमें AI के विकास के कारण लाखों लोगों की नौकरियां जा सकती हैं या उन्हें अपना करियर बदलने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
इन सामाजिक जोखिमों के बीच, अमेरिकी प्रशासन नियमन में ढील (deregulation) और तकनीकी क्षमताओं के विस्तार पर जोर दे रहा है, ताकि वैश्विक तकनीकी क्षेत्र में अमेरिका का प्रभुत्व बनाए रखा जा सके।